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महात्मा गांधी द्वारा खोला गया ये स्कूल, आज फंड्स भी नहीं है इसके पास।

गांधीजी से जुडी हर चीज़ से आज हर भारतीय बहुत इज़्ज़त करता है।पर एक जगह ऐसी है जो गान्धीजी से जुडी है पर आज उसकी हालत बहुत खराब है।न कोई देखने वाला है और न ही वहां इतने पैसे है कि उस जगह का ध्यान रखा जा सके।तो कौन सी है ये जगह।

credit: third party image reference

30 सितंबर 2018 को एक म्यूजियम का इंनौग्रेशन किया जा रहा है।यह म्यूजियम वही स्कूल है जहाँ गांधीजी ने अपनी पढाई की शुरुआत की थी।जिसमे इंनौग्रेशन इंडिया के प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी करेंगे।इस म्यूज़ियम के कुछ ही दूरी पर एक और जगह है।एक स्कूल,जिसको गान्धीजी ने ही 1921 में खोला था।इस स्कूल का नाम राष्ट्रीय शाला है और ये म्यूज़ियम से सिर्फ 2 किमी दूर है।70 से 90 के दशक के बाद भी यहाँ 1000 बच्चे पढ़ते थे पर 2017 से यहाँ बस 37 बच्चे ही रह गए है।वजह से की स्कूल के वास फंड्स ही नहीं है।डोनेशन न मिलने की वजह से आज ये हालत है कि स्कूल बंद होने की कगार पर खड़ा है।या खबर के बाद अब जो बच्चे रह गए है वो भी कहीं और एडमिशन ले लेंगे।

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आज़ादी की लड़ाई के दौरान स्टूडेंट्स को कोई परेशानी न हो और उनको पढ़ने के लिए अच्छी जगह मिले इसलिए महात्मा गांधी ने इस स्कूल को खोला था।इसका कॉन्सिटूशन भी बापू ने बनाया था।वो अपनी प्राथना भी इसी जगह करते थे और उपवास भी।जब बापू अफ्रीका से वापस आये तो उन्होंने भारत को अंग्रेज़ो की गुलामी में पीसते देखा।और उनको समझ आया की इससे बचने का एक रास्ता है कि भारत को एडुकेट होना पड़ेगा।इसी सोच में उन्होंने राष्ट्रीय शाला को शुरू किया।

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आज इस जगह को तक़रीबन 30 लाख रूपये हर हाल में चाहिए।कुछ वक़्त पहले स्कूल को बचाने की अपील करने के लिए एक बुकलेट भी निकली गयी थी।जा बुकलेट में स्कूल ने अर्ज़ी दी थी की प्राइमरी और म्युज़िक के लिए हमे सरकारी मदद नहीं मिल रही है।जीतू भट्ट जो स्कूल के मैनेजिंग ट्रस्ट में से है कहते है कि सालाना 8.30 लाख का खर्चा है स्कूल का।पर हमारे पास पैसे नहीं है,तो स्कूल को बंद करना ही पड़ेगा।जीतू भट्ट ने CM से मिलेने की भी कोशिश की लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पायी।

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